क्या लालबाग मंडल का निर्णय 2020 में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने के सम्बंधित सही है?

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कोविड ​​-19 ने संपूर्ण मानव जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। जैसा कि जीना मुश्किल हो गया है, अधिकांश सामाजिक स्थानों को बंद कर दिया गया है, या सार्वजनिक त्योहार कम भीड़ में मनाया जाता है, इसलिए अब 1 जुलाई को लालबाग गणेशोत्सव मंडल ने इस साल गणेशोत्सव नहीं मनाने का फैसला किया है और भगवान गणेश की मूर्ति  स्थापित नहीं करेंगे,  उन्होंने 11 दिनों के लिए उस स्थान पर रक्तदान और प्लाज्मा शिविर शुरू करने का फैसला किया है। यह इतिहास में पहली बार होगा कि लालबागचा राजा की स्थापना नहीं की जाएगी।

क्तदान और प्लाज्मा शिविर का निर्णय सही और अच्छा है। लेकिन भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करना मुश्किल नहीं है, ज्यादातर लोगों ने कहा कि भगवान गणेश की मूर्ति को हर साल की तरा 14 फीट  लांबी ना रखते हुवें, इसे 1 से 3 फीट तक रखना चाहिए और घर के गणेश पुजन की तरह पूजा करनी चाहिए। लोगों को जाने की अनुमति न दें, लोगों को दर्शन करने की अनुमति न दें, बस हर दिन एक लाइव दर्शन करें

हाल ही में आपने ओडिशा में जगन्नाथ पुरी महोत्सव पर फैसला सुना होगा, सर्वोच्च न्यायालय ने महोत्सव की अनुमति दी थी, लेकिन यह सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के तहत था।

अदालत ने लोगों की आस्था, विश्वास और भावनाओं को देखते हुए अपना फैसला सुनाया होगा। भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना और गणेशोत्सव भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के अनुसार मनाया जा सकता है, लालबाग के राजा की मूर्ति को स्थापित नहीं करणे का निर्णय बहुत ही चौंका देने वाला है।

लालबागचा राजा को मन्नत के देवता के रूप में जाना जाता है। कई लोगों की भावनाएं इसमें शामिल हैं, हम मूर्ति स्थापना की परंपरा को तोड़ना नहीं चाहते हैं जो कई वर्षों से चल रहा है, हमें इसका समाधान खोजना होगा। लालबाग मंडल द्वारा मूर्तियों को नहीं स्थापित करणे के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

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